अकेला सा दिल, खामोश सी रात,
चुप्पी में छुपी हर अधूरी बात।
सन्नाटों ने जैसे मुझको घेरा,
यादों ने फिर धीरे-धीरे बसेरा।
बिन आवाज़ के सब कुछ कह जाता,
अकेलापन भी साथी बन जाता।
खामोशी में भी एक सुकून है छुपा,
जैसे दर्द में भी कोई मीठा सा नशा।
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