अकेलापन वो चादर है, जो रात में ओढ़ लेते हैं,
कभी सितारों से बातें करते, कभी खुद से रूबरू होते हैं।
इसकी खामोशी में है चीख, जो केवल दिल सुनता है,
और जब ये दिल को छू जाती, तो कोई गहरा गीत बुनता है।
अकेलापन कभी सजदे में ढल जाता है,
तो कभी खुद से उठते सवालों का हल बन जाता है।
ये नहीं है किसी की कमी, बल्कि खुद से एक मुलाकात,
कभी शांत झील सी, तो कभी तूफानी रात।