अकेले रास्ते पर, चलते-चलते मैं,
सोच में पड़ जाता हूँ, खुद से मिलते-मिलते मैं।
चारों ओर खामोशी, बस साथ मेरी तन्हाई,
कुछ ख्वाब अधूरे, कुछ बातें पुरानी।
आंखों में कुछ बूंदें, दिल में उठती हलचल,
अकेलापन मुझसे कहता, "तू नहीं है अकेला, पल।"
इस शांति में छुपी, एक अद्भुत शक्ति,
सिखाती है मुझे, जीवन की सच्चाई, एक अनोखी दृष्टी।
अकेलेपन में ही, मिलती है मुझे मेरी आवाज़,
उससे करता हूँ मैं, अपने अंदर की खोज।
इस अकेलेपन में ही, समझ आती है जिन्दगी,
ये सिखाता है मुझे, खुद से मोहब्बत करना, सही मायने में जीना।