अकेले पथ पर चलता जाता हूँ,
सन्नाटों की गोद में पलता जाता हूँ।
कोलाहल से भरी दुनिया में,
एकांत की आवाज़ में खो जाता हूँ।
कभी-कभी लगता है जैसे,
अकेलापन ही सच्चा साथी है।
भीड़ में भी अपने अस्तित्व से,
दो पल का मिलन सबसे बड़ी बाती है।
अकेलापन भी क्या शै है,
अपने में एक नया संसार बसाता है।
सीखा देता है आत्म-निर्भरता,
और खुद से ही खुद का परिचय कराता है।
सुना है, अकेलापन कड़वा होता है,
पर मेरे लिए तो वो मधुर गान है।
जो नहीं खोजता उसे बाहर,
उसे खुद की गहराइयों में पान है।
अकेलापन नहीं है खालीपन,
यह तो आत्मसाक्षात्कार का द्वार है।
जो अपने आप में खुश है,
वही तो इस भीड़ में भी सिक