अकेलापन का संसार

इस खालीपन में कुछ भरने को मन करता है,
बीन रहा हूँ यादें, पर कुछ तो कम करता है।
खिड़की से आती हवाओं में संगीत खोजता,
पर इस खामोशी में भी अपना एक गीत होता है।

अकेलापन शोर से भी बड़ा,
इसमें बसा अपना ही एक संसार।
जहाँ बातें सिर्फ मैं और मेरे ख्याल,
और यादें हैं वो, जो देती हैं सहारा हर बार।

लगता था पहले, अकेलापन बस एक खालीपन,
पर अब जाना, इसमें छिपे कई रंग और अपनापन।
इसे बीतते, बुनते, सजाते हुए,
मिली मुझे मेरी ही सोचों से एक नई पहचान।