अकेलापन की गहराई

इस अकेलेपन में खोया हर शख्स,
कभी खुद से मिलता, कभी खुद से बिछड़ता।
शोर में भी एक सन्नाटा सुनता,
भीड़ में भी एकांत का साथी बुनता।

दीवारों से बातें, तारों से सपने,
इन खामोश लम्हों में ही जीवन के अर्थ अपने।
अकेलापन जब गले लगाता है,
मन के सागर में गहरे उतर जाता है।

खुद को पाने की एक कोशिश,
इस अकेलेपन में छिपा है जीवन का विशेष।
समझ आती है खुद की आवाज़,
जब दुनिया का शोर हो जाता है साफ़।