अकेलापन, एक सन्नाटा है, जो शोर से भी गहरा होता,
एकांत में खोए से हम, खुद से गहरे संवाद करते।
जहाँ कभी खिलखिलाहटें थीं, वहाँ अब मौन का बसेरा,
किसी की याद में जीना, किसी के भूल जाने का डेरा।
तारों से बातें करना, चाँद को दोस्त बनाना,
इस अकेलेपन में ही सही, खुद को पहचाना।
एक अजीब सी ख़ुशी है, इस एकांत में भी,
खुद से मिलने का सुख, इसी तन्हाई में है छिपी।
अकेलापन नहीं है खालीपन, ये तो खुद से मिलने की घड़ी है,
जहाँ आत्मा से आत्मा का संवाद, एक सुंदर कवितावली है।