अकेले पन की गहराइयों में

जहाँ शब्द भी साथ नहीं देते,
और खामोशी संगीत बन जाती है।
ख्यालों के कारवां साथ चलते,
पर धड़कनें अक्सर ठहर जाती हैं।

अकेलापन, वो मीत जो बिन बुलाए आता है,
दर्द और उम्मीदों के बीच बस जाता है।
इसे निभाना एक कला है,
आत्मा की गहराई से मिलना, जीवन को समझना।

जहाँ हर लम्हा एक नई सीख लाता है,
और हर खामोशी में आवाज़ें चुपके से बतियाती हैं।
अकेलेपन में ही कहीं खुद से मिलन की राहत मिलती है,
और हर आंसू में मुस्कान की एक नई कहानी सिलती है।

इस अकेलेपन में ही नए सपनों का जन्म होता है,
जहां खुद को खोना, फिर से खुद को पाना होता है।
अकेलापन, नहीं है अंत, बल्कि एक नई शुरुआत का संकेत है,
जीवन की इस