जहां शोर नहीं, बस सन्नाटा है
जहां उजालों की बात नहीं, बस अंधेरा पसरता है
वहाँ संगी साथी की बात नहीं, अकेलापन साथ चलता है
मगर इस अकेलेपन में ही, मैं खुद से मिलता हूँ
कभी ये अकेलापन, बोझ सा लगता है
तो कभी ये मेरा साथी बन, सुकून दे जाता है
जहां शोर नहीं, बस सन्नाटा है
जहां उजालों की बात नहीं, बस अंधेरा पसरता है
वहाँ संगी साथी की बात नहीं, अकेलापन साथ चलता है
मगर इस अकेलेपन में ही, मैं खुद से मिलता हूँ
कभी ये अकेलापन, बोझ सा लगता है
तो कभी ये मेरा साथी बन, सुकून दे जाता है