अकेलेपन की डायरी

रिक्त कमरे में बैठा हूँ मैं
चुप्पी के सागर में डूबा हुआ

दीवारें साक्षी हैं मेरी निःशब्दता की
मौन आवाज़ें करती हैं फुसफुसाहट

कभी-कभी याद आते हैं चेहरे
जो अब बस तस्वीरों में रह गए

हाथ बढ़ाता हूँ, पर कोई नहीं मिलता
अकेलापन मेरा एकमात्र साथी