अकेलेपन की गलियां

अकेलेपन की गलियां, सन्नाटों से भरी,
हर कदम पर यादों की, एक नई कहानी गढ़ी।

वो खामोश लम्हें, जब दिल खुद से बातें करे,
अंधेरों में भी, अपनी रोशनी खुद ही ढूँढे।

अकेलापन जब हद से गुजर जाता है,
तो इंसान खुद को फिर से पा जाता है।

इस खामोशी में शोर सुनाई देता है,
खुद की आवाज़ में, जवाब छुपाई देता है।

अकेलापन, शायद एक सफर है खुद की ओर,
जहाँ हर कदम, खुद से एक नया विजयी दौर।