अकेलेपन की गूँज

गहरे सन्नाटे के बीच,
एक आवाज़ सुनाई देती है।
अपनी ही दिल की धड़कन,
अकेलेपन की गूँज में खो जाती है।

रात गहराई, तारों की चमक में,
अपने साये से बातें करता हूँ।
खुद से ही सवाल, खुद से ही जवाब,
इस अकेलेपन में, अपना आभास करता हूँ।

कभी यह एकांत, शांति का सागर,
कभी असहनीय शोर बन जाता है।
इस अकेलेपन में, अपने आप से,
गहराई से मिलने का द्वार खुल जाता है।

अकेला होना, कभी दुख नहीं,
यह तो एक रहस्यमय सफ़र है।
जहाँ खुद को पाने की, खुद से बढ़ने की,
अनोखी लड़ाई, एक अद्भुत सफ़र है।