अकेलेपन की राह पे, चलता गया मैं खुद से बातें करता,
खोजा करता वो साथी, जो दूर से ही सही, मगर हो मेरी जज्बातों का मरहम।
चाँदनी रातों में, सितारों से गुफ्तगू करता,
कभी-कभी तो यूं ही, उनसे मेरी दोस्ती हो जाती।
ये अकेलापन, नहीं है बस एक खालीपन,
ये तो खुद से मिलने का, एक सबसे बेहतरीन अवसर है।
सोचा करता, क्या खोया, क्या पाया,
इस खोज में, खुद को ही फिर से पाया।
अब ये राहें नहीं लगतीं वीरान,
साथ है मेरा, मेरा अपना साया।