*अलौकिक शक्ति*
ईश्वर के हों भले ही रूप अनेक
सभी के भगवान हैं केवल एक
सम्पूर्ण सृष्टि को वो है चलाता
तभी कहलाए भाग्य- विधाता
मर्ज़ी बगैर इनकी पत्ता ना हिले
स्व-कर्मों से ही सुख-दुःख मिले
कष्ट ना कभी पहुंचाना , ना ही देना धोखा
ऊपर वाले के पास है, सबका लेखा-जोखा
इनका सोचा प्लान कभी फेल नही होता
इनके ध्यान सागर में लगा लो सब गोता
अग्नि,जल,पशु हो या भूमि,वृक्ष - वायु
सन्मार्ग पर चलने से निश्चित बढ़ेगी आयु
बिना भक्ति भाव से ईश्वर का अर्चन कैसा
किनारे पर बैठकर सागर के दर्शन जैसा
सूरज देवता बनकर करे रोज़ ये सवेरा
चांद बनकर निकलते जब छाए अंधेरा
ना हो उदास मैं, तेरे ही आसपास हूँ
दिल से तू याद कर, मैं तेरा विश्वास हूँ
भरोसा खुदा पर है तो
तक़दीर का लिखा पाओगे
यक़ीन ख़ुद पर है तो खुदा
वही लिखेगा जो आप चाहोगे
योग्यता अनुरूप जो मिला मान लो इसे वरदान
परमार्थ सेवा में लगे जीवन
जब तक हमारे हैं प्राण
मरता है बस शरीर
अमर होती है आत्मा
निःस्वार्थ दान से मिलें
परम् पिता परमात्मा
जग के रखवाले का रूप
है अद्भुत और निराला
अमृत हम पर बरसाकर
खुद पिया विष का प्याला
भक्तों पर कोई आती मुसिबत, सद्बुद्धि देकर इन्होंने संभाला
समस्त ब्रह्मांड है सदा
जिसके संरक्षण, शरण मे
नमन है ऐसे परम् पिता को
उनके पवित्र श्रीचरण में
जब इन्होंने जन्म दिया
यही रखेंगे सबकी खैर
रखना हमे सबसे मित्रता
रखना नही किसी से बैर
सारे साथी काम के
सबका अपना मोल
जो संकट में साथ दे
वही सबसे अनमोल
मिल जाते पाप के फल
मिटते हैं कष्ट अपार
जिस पर देव की हो कृपा
उसका हो बेड़ा पार
यह जग तुझमे ही है समाया
दर से कोई ना खाली आया
कभी ना जिसने दिल दुखाया
उसने बिन माँगे ही सब पाया
जो पाया वो साथ रहेगा
यह भ्रम है इंसान का
खाली आया, खाली जाएगा
यहाँ सब कुछ है भगवान का
©pankajjain
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