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“अनदेखे इश्क़ की दास्तान”🥺📝

“अनदेखे इश्क़ की दास्तान”🥺📝

मेरी आरज़ू भी तू ही है,

मेरा ख़्वाब भी तू ही है।

तेरी मुस्कान दिलनशीं है,

तेरी निगाहें बेमिसाल हैं।

नहीं जानती कैसा है तू,

बस इतना जानती हूँ —

मेरा है तू।

इन निगाहों ने तुझे कभी देखा भी नहीं,

फिर भी ये दिल रोज़

तेरी तस्वीर बनाता है।

तू मेरी कशिश नहीं,

तू मेरी चाहत है।

जिस्म अलग हैं शायद,

मगर रूह तो एक ही है।

अब तो तेरे बिना

हुजूम में भी तन्हा हूँ,

दुनिया ख़फ़ा हो जाए,

मगर हमारी मोहब्बत फ़ना नहीं होगी।

दुनिया के सितम सहकर भी

हम मिलेंगे कभी न कभी,

ना रोना, ना घबराना —

ये मेरा यक़ीन है।

मेरी फ़रियाद बस इतनी है,

ऐ ज़िंदगी, चाहे मुझे छीन ले,

मगर हमें कभी जुदा मत करना।

उस हिज्र को सहने की

मुझमें सामर्थ्य नहीं,

तू हवा बनकर आया,

और रेत सा उड़ गया।

अब तेरा मिलना भी

मुझे ख़्वाब सा लगता है,

महफ़िल में हम हँस तो लेते हैं,

मगर अंधेरी रातों में

फिर से ग़मगीन हो जाते हैं।
#PoeAwards#Poemia#Love#sad#Pain