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अंधविश्वास पाखंड और कुरीति को क्यों नहीं छोड़ दे

अंधविश्वास पाखंड और कुरीति को क्यों नहीं छोड़ दे
क्या नारी को सम्मान से जीने का हक नहीं समाज में
तो हर रिश्ते को निभाती है तो फिर पीछे क्यों नारीत्व
तेरे बिना सृष्टि का कोई भी वंश आगे नहीं बढ़ता क्यों
हर रिश्ते पर तेरी बलि चढ़ाई जाती है क्या सम्मान
कभी तुमको बांझपन का कारण बताता कापुरुष
कभी अपने पुरुषार्थ पर उंगली नहीं उठने देता क्या
नारी तुझको सिर्फ भोग विलास की वस्तु समझता
यह गूंगा बहरा समाज क्या जाने तेरे उत्पीड़न को
कभी डायन कहकर तुझे बुलाते तो कभी बांझपन
सुना है कई प्रदेशों में तुझे डायन का दर्जा भी दिया
कोई नहीं सुनता तेरी फरियाद को सत्ता में शासक
हर दिन तेरे साथ कहीं ना कहीं होता बलात्कार क्यों
नारी तेरे स्वरूप को क्यों इतना कुरूप बनाता इंसान
नासमझ अपने को तो उठा अपने हाथों में हथियार
कमजोर फूलन देवी उठाया था सम्मान को हथियार
बाली उम्र में कर दिया था गौना फूलन के यौवन का
कितनी बार हुआ शोषण उसके शरीर के यौवन वन
टूट गया बांध सब्र का उसने उठा लिया हथियार था
फिर नहीं रुकी उम्मीद है उसके हौसलों की फूलन
आजकल खबरें भी अखबार में छपती तो हैं हिंसा की
कभी तेरे साथ बलात्कार की तो कभी छेड़खानी की
क्यों नहीं बन जाती तुम दुर्गा स्वरूप में है अवतार तेरा
इन दरिंदों की बलि तू ले सकती क्यों नहीं आत्मरक्षा
तोड़ दे परंपराएं ऐसी जो तुझे सम्मान ना दें जीने का
उठा ले कलम लिखने की और लिख डाल इतिहास
कुछ तो तुझे करना होगा हर बार अग्नि परीक्षा ना दे
ना बन तू सीता क्योंकि हर बार तुझे बनवास होगा
बहुत दे दी तुमने अग्नि परीक्षा है कुछ तो आत्मरक्षा
फक्र कर तू अपने नारी सशक्तिकरण का सम्मान है
हर तरफ तेरी साथ होता क्यों नहीं होता इंसाफ तेरा
तेरे बलिदान पर आज बन चुकी है देश की सरकारें
©lawnishtha