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अनजान डगर

मै गया उस डगर को
इक अनजान सफर को
मेरी मुलाक़ात हुई उस अजनबी से
कुछ समझ मे
कुछ बेसुधी से....
खोया था मै,
उसकी नज़र मे,
इक झलक मे,
इक फलक मे......
उस अनजान सफर मे
उस अनजान डगर मे
उस प्यार के राह मे
तेरी हाँ की इन्तजार मे
उस अनजान डगर मे
उस अनजान सफर मे.....
-Durga (Diya)
©diyadeepak