#कविशाला
राख कर जाऊं
मैं ख़ाक कर पाऊं
हैसियत जो समझता जितना पाक
उस हैसियत के इतर मैं खड़ा हो जाऊं
पाक हो जाऊं
शुद्धता की तपिश से ख़ाक हो जाऊं
मिले जो भंवर उससे लोह ले पाऊं
जंजाल तन ये कोई मिशाल बन जाऊं
जनचेतना का अद्भुत ज्वार बन जाऊं
सारे हकीमों का हाकिम सरदार बन जाऊं
तय वक्त मे गुलामी को अनुशासन का सरल मार्ग बता पाऊं
ललाट पर निखरी लाली को रक्तानुपात मे ले आऊं
बिसरे दिनों की इक परछाई भी जरा बन पाऊं
उद्गार सहित हृदय मे उतना सबको बसा जाऊं।।
(इति)
@sandeep_barwani
Abhimaanniyu
©barwani
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