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अरे बोल अब

कभी धूप तो कभी शाम
कभी शहर तो कभी गाँव
कभी नाम कभी बेनाम
कभी मुआफी कभी इंतकाम
ऐ खुदा क्या केवल यही हैं
इस जिंदगी के काम?
©msuryam