अर्थ की खोज

कण-कण में बिखरा प्रकाश, जीवन का अर्थ ढूंढते रहे,
हर दिन, हर रात को, मन के पन्नों में सजोते रहे।

कभी सुख, तो कभी दुख में, खुद को परिभाषित करते रहे,
समझाया खुद को, जीवन तो विचारों की धार में बहते रहे।

जीवन का अर्थ न कोई शब्दकोश में मिला,
न किसी ऋषि के वचनों में ढला।

उन छोटी खुशियों में, जब परिवार संग हँसा,
उस संतोष में, जब अजनबी को अपना बना दिया।

तो मिला जीवन का अर्थ, न संग्रह में, न भाव में,
बल्कि उस पल में, जब हमने प्रेम को जिया।