अर्थव्यवस्था या महामारी सब कुछ घातक है देश में
कोरोनावायरस ने को हर कोई तैयार है जनता कर्फ्यू
तो फिर क्यों खोल दी गई दुकान है शराब खाने की
जो व्यक्ति समझ नहीं पाता अपने कदम पीने के बाद
उसको तुमने अर्थव्यवस्था का चौथा स्तंभ करार दीया
कब तक तुम अर्थव्यवस्था को थोड़ा सुरक्षित रखते हैं
रोटी कपड़ा मकान जरूरत नहीं देश की आज क्यों
क्या अर्थव्यवस्था है देश की दारु की दुकान है क्यों
पढ़ने को किताबें नहीं और सुचारू नहीं शिक्षा क्यों
समझते हैं कि महामारी नहीं पहले की ज्ञान जरूरी
दारू के ठेके नशा मुक्ति केंद्र हैं समाज व्यवस्था के
राजनेता चुनावों में खर्च क्यों करते हैं दारू व पैसा
कितनी अर्थव्यवस्था बढ़ी है दारूबाजों के दारु पीने
इतनी बढ़ गई बीमारी देश में पीने से दारू दुकान है
खाने को अन्न का दाना नहीं घर में होगा शराब पीने
हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला यूं ही बदनाम नहीं
कटु कटाक्ष और व्यंग तीखी नोकझोंक है मधुशाला
तलाश मंदिर मस्जिद गिरजाघर और गुरुद्वारे की नहीं
तलाश जरूरत के सामान की नहीं है सिर्फ शराब की
नशे से कहां स्थित होता है मन मस्तिष्क और समाज
महिलाओं ने अपील की कि दारु की दुकानें ना खोलें
कहां सुनती है जनता की आवाज की लोकतंत्र सत्ता
चाहता है हर कोई अर्थव्यवस्था और महामारी रुके
40 दिन दुकानें बंद रही अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई
जनता ने दिल खोलकर खजाना भर दिया राहत कोष
राहत कोष जनता का जनता के द्वारा दिया गया दान
क्या इसकी जानकारी जनता नहीं चाहती लोकतंत्र है
देश के बंटवारे के साथ प्रधानमंत्री राहत कोष बनाया
और कोरोना महामारी पर एक नया राजकोष बन गय
कभी जवाबदेही सरकार बन जाओ मन की बातें छोड़
देश में अभी महामारी है शराब की दुकान में बंद होनी
किसी को बातें गलत लगती हैं लग जाए जवाबदेही है
नशा कब उतरेगा राजनीति का और अंधभक्ति भक्तों
किसानों के लिए कर्जमाफी हो या ना हो मगर आज
उद्योगपति के कर्जमाफी जरूर होंगे करोड़ों लुटेरे के
शराब का व्यापारी माल्या भाग क्या हुआ ए जनाब
सब कुछ डूब गया अर्थव्यवस्था अब जवाबदेही नहीं
©lawnishtha
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