अतीत के पन्नों में छिपी, यादों की वो मीठी गलियां,
हर मोड़ पे बिखरे ख्वाब, अनगिनत अधूरी कहानियां।
वो पहली बरसात की बूंदें, वो धूप में खेलने की दोपहर,
एक-एक करके सब सिमट आए, जैसे कोई पुरानी तस्वीर।
कुछ खट्टी, कुछ मीठी यादें, कुछ बिना कहे समझ आई,
जैसे जीवन की राहों में, ये यादें संगी-साथी बन आई।
जीवन के हर पड़ाव पे, अतीत की ये कहानियां,
जैसे कोई लंबी दोस्ती, बुनती रही ये यादों का ताना-बाना।
दिल की गहराइयों से, फिर एक बार वे सब याद आए,
जैसे अतीत के सागर में, फिर से नयी लहरें उठ आए।
यादों के इस जहां में, अतीत जैसे जीवित हो उठता,
हर खुशी, हर गम के साये में, यादों का खजाना छुपता।