अतीत की गलियाँ

अतीत की गलियाँ, सुनी और पुरानी,
हर मोड़ पर एक कहानी।
जिनमें बसी है यादें, बीते लम्हों की,
कुछ मीठी, कुछ खट्टी, कुछ अनजानी।

वो बीते पल जो रह गए पीछे,
बन गए हैं नज़रों में छवियाँ।
कुछ हंसी, कुछ आँसू, कुछ सपने,
संजोए हैं इनमें सभी इम्तिहान।

कभी-कभी उन गलियों में चल पड़ता हूँ,
खोजता हूँ वो खोया हुआ आशियाना।
जहाँ खेला करते थे हम उमंगों के साथ,
लौट आए वो दिन, यही कहता हूँ मनाना।

पर वक्त के साथ चलना है मुझको,
अतीत की यादें हैं बस सुखद सपना।
जीवन की इस दौड़ में बढ़ते जाना है,
यादों का कारवाँ, बस एक सुनहरा अपना।