अतीत की गलियों में

अतीत की गलियों में, जहां धूल और खुशबू मिलती है,
यादें घर बनाती हैं, खिड़कियों से झांकती रहती हैं।

कभी एक चिट्ठी बन कर, कभी पुरानी तस्वीर बन जाती,
यादें, समय की दीवारों पर बीते लम्हों का रंग चढ़ाती।

वो पहली बारिश, मिट्टी की खुशबू, और गली का वो चौराहा,
अतीत धरोहर है, यादों का खजाना है, जिसे दिल सजाता।

मगर यादें भी धोखा देती हैं, कभी खुशी, कभी आंसू लाती,
अतीत की गलियों में भटकना, यही तो ज़िंदगी की राहत है।

अतीत और यादें, समय के साथ एक दूसरे में घुलमिल जाते,
ख़्वाबों की तरह होते हैं, जिसे हम जागते हुए भी देखते हैं।