अतीत की गलियों में

अतीत की गलियों में, यादों का कारवां चलता है,
कुछ खोया सा, कुछ पाया हुआ, हर पग पर, सवाल उठता है।

बीते लम्हे आँखों में तैर जाते हैं,
कभी हँसाते, कभी रुलाते हैं।

उन गलियों में दोस्ती के चिराग जलते हैं,
पुराने गीत, किस्से, फिर से पलते हैं।

वो पहली बारिश, वो आखिरी बिछड़न,
हर एक कहानी, लिखी बस ज़िंदगी के मर्म में।

अतीत वो स्कूल है, जहां हर दिन, कुछ नया सिखाता है,
यादें वो किताबें हैं, जो हर पल, हमें आइना दिखाता है।

तो चलो, इन गलियों में फिर से भटकें,
अतीत की मिठास में, आज को सजाएं, और मुस्कुराएं।