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# Aurangabad rail incident...!

उन सोलह मजदूरों की यह मजबूरी तो देखो।
अपनों से बड़ती अपनों की यह दूरी तो देखो।।
खाली जेब, भूखा पेट, बहता पसीना तो देखो।
अभावों में भी खुशियों के साथ जीना तो देखो।।
निकले थे जो पैदल ही घर पुहंचने की आस में।
आस आस बन गई अब न होती पूरी तो देखो।।
©amanjain