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बागीचे की कहानी

बागीचे की कहानी

हर बगीचे की बात है,

कई माली और हजारों फूल है,

कितनी मेहनत लगती है

माली की कोशिश फूलों की जान है,

क्या हो एक रोज जब,

कोई चोर घुस जाए?

मासूम उन फूलों को

पैरों से रौंद जाए,

जलता होगा दिल माली का,

हर आंसू से धुआं उठता होगा,

करता होगा मन, चोर को ढूंढ निकाले

पत्थर, उस चोर के पैर कुचल दे,

कुछ ऐसा ही हुआ था एक रात

कई फूल मिल गए माटी में,

कुछ जलने वालों ने साजिश की,

फूलों को रौंदा, कांटे छोड़ गए

क्या दोष भला उन फूलों का?

अपनी माटी में मिल जो गए,

और वो कांटे बेबस

देख कर भी कुछ कर न सके,

वो चोर छुपे थे पेड़ो पर,

जो माली के ही घर में थे,

जलते थे प्यारे बगीचे से

तो महक चुराए जो प्यारे थे,

फिर माली ने भी कदम उठाया

उन कांटो को सहारा बनाया,

छल्ली कर दिए उन हाथों को

जिसने वो फूल चुराया,

कोशिश जारी माली की

हर पैर अब निशाना है,

जो कदम बढ़ाए फूलों तक

उन सबको मिटाना है,

कांटो को बुन दिया जाल से

और घेर दिया बागीचे को,

पहले, इंतेज़ार किया कुछ देर

अब ढूंढ रहा है चोरों को,

धीमी धीमी चाल नहीं है

पूरी बिसात है बिछी हुई,

चोरों के कदम है मिटने वाले

फूलों की खेती बढ़ने वाली।