जिसे तुम बाल श्रमिक कहते हो वह जिम्मेदार घर का है
उसके हाथों में पढ़ने की किताबों की बजाय जिम्मेदारी है
घर में छोटा है या बड़ा मगर जानता जिम्मेदारी अपनी को
नहीं समझता कोई उसके पढ़ने की जिम्मेदारी जानते हो
जिसे छोटू तुम कहते हो उसका नाम भी है किताबों में
बस कुछ जिम्मेदारी है जिन्हें निभाता है कांधे रख फर्ज
बाल श्रम जिम्मेदारी है परिवार के मुखिया होने की देखो..1
हजारों लोग गुजरते रास्ते में देखकर नहीं पढ़ने का कहते
बाल श्रम की जिम्मेदारी सरकार की है रोकती कहां है
चाय की दुकान हो या पंचर की दुकान हर तरफ बाल श्रम
नन्हे हाथों में किताबों की जगह कुशल कामगार अकुशल
मेहनत के नाम पर मिलते हैं 100 ₹200 सात दिवस के
फिर भी क्या रोक पाया बालश्रम जिला प्रशासन आज इसे
चिंता इसके भविष्य की या नहीं है,तुमको बाल श्रम की...2
समय बीत गया गुलामी से आजादी कब मिलेगी बाल श्रम
कई बार रोक लिया जाता बालश्रमिक न रोकता श्रमायुक्त
अपने बच्चों को स्कूल की शिक्षा एवं मज़दूर को श्रमशिक्षा
देश गांव का शहर श्रम और परिश्रम दोनों अटूट रिश्ते हैं
तुम शहर को आबाद रखते हो मगर यह तो बधुआ मजदूर
कर्ज में डूबा परिवार की जिम्मेदारी उठाए तो कैसे बालश्रम
एक बात याद रखना इसकी हाथों का हुनर दे अर्थव्यवस्था
©lawnishtha
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