देखो ये बारिश भी क्या कहर ढा रही,
फसल पकने को ओर यह मजबूर किए जा रही ।
रहम होगी थोड़ी सी भी ,
तो चेहरे खिल उठ जाएंगे ।
यूं ही अपना रोप दिखाती बरसोगी,
हम तो भूखे ही मर जाएंगे ।
बस करो अब गर्जना तुम ,
हम डरकर सहम जाएंगे ।
कह दो अपने बादलों से अब,
जा कर कहीं छीप तुम जाएं ।
खिल उठेगी धूप अगर तो,
फसल हमारी पक जायेगी ।
ओर ना तड़पाओ हमारी किस्मत को तुम,
तरस जाएंगे हम अपने जीवन जीने को ।
विनती है प्रभु आप से अब,
खुशियां हमारी लौटा दो ।
खिल उठेंगे चेहरे फिर से,
आशा की नई किरण जगा दो तुम।
©sanjulv
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