बारिश के दिन

छम छम बारिश आई है,
अपने संग खुशियाँ लाई है।

मिट्टी की सोंधी खुशबू में,
बचपन की यादों को बुलाई है।

कागज की नावें बनाईं,
बारिश में उन्हें बहाई।

छत पर बूंदों का म्यूजिक है,
जैसे नैचर की अपनी लाइव थिएट्रिक है।

कुछ कहती है ये बारिश मुझसे,
हर अंत के बाद नयी शुरुआत बताती है।

इन बारिश के दिनों में,
हर बात में एक नई मिठास है।

सूरज की पहली किरण के संग,
इंद्रधनुषी वादा भी कुछ कहता है।

बारिश के दिनों में ही सच में,
जीवन का सुंदर उत्सव देखा है।