बारिश के दिन

बूंदों का वो मधुर गान,
छत पे बजता संगीत जैसे।
धरती की प्यास बुझाने,
आया आसमान से मैसेंजर जैसे।

गलियों में बहता जल,
कहानियां सुनाता हर कल।
बच्चे, गलियों में कागज़ी नाव चलाते,
मानो हर इक बूंद में, नई उम्मीद जगाते।

पेड़-पौधों को मिलती नई जिंदगी,
बारिश के दिन, लाते हैं नई ताजगी।
हवा में घुलती मिट्टी की सौंधी खूशबू,
लगता है जैसे, प्रकृति से मिला इक नया सृजन।

बारिश के दिन, ना सिर्फ पानी बहाते,
दिलों को भी वो नजदीक लाते।
चाय की चुस्कियों में, पकोड़ों की बातें,
ये दिन, यादों के झरोखे खोल जाते।