बारिश की बूंदें, धरती पर रूपक खेलती,
आसमान से नीचे, सपनों में इन्हें पेलती।
काली घटाएँ, पर्दों की तरह घिर आईं,
धरा की प्यास बुझाने, कहानियाँ बन आईं।
हरित वन पर नया आवरण चढ़ा,
मिट्टी की सौंधी खुशबू में खो जा।
पानी की हर एक बूंद में मिला संगीत,
बच्चों की हंसी में खिला हर एक गीत।
आसमानी इन्द्रधनुष, नव विचारों की सीढ़ी,
बारिश के दिन, प्रेम व उल्लास की कड़ी।
छतरियों के नीचे, चल पड़े हैं कुछ कदम,
सांझ की रौशनी में, सजती हैं नई स्वप्न।