बादलों की गोदी से, गिरती बारिश की कुछ बूंदें,
संगीत बन जाती हैं, छत पे टकराई हुई सुन्दर धुनें।
पेड़ों के पत्ते नाच उठते, खुशियों की एक अनोखी उड़ान,
मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू, ले आती है जीवन में जान।
बारिश के इस दौर में, हर चेहरा खिल उठता है,
पुरानी यादों का कोना, फिर से जी उठता है।
कागज की नाव तैरती, पानी की इन धाराओं में,
बचपन की मीठी यादें, दिल के किसी कोने में।
बारिश की ये बूंदें, कुछ कहती हैं हमसे,
भूल जाओ दुःख-दर्द, जी लो ये पल हंस के।