जब आसमान से बारिश के गीत बहने लगते हैं,
धरती की प्यासी बाहों में सिमट आते हैं।
उस शोर में कहीं प्यार की धुन मिलती है,
और हर कली मुस्कान से खिल जाती है।
बूंदों का वो नर्तन, छत पे तराना,
हर दिल को छू जाए, जैसे कोई पुराना गाना।
गर्म चाय की चुस्की, और किताब के पन्ने,
बारिश के दिनों में खुद से ही बातें बुने।
कागज़ की कश्तियां, पानी का वो मेला,
भीगते हुए बच्चे, लगते हैं जैसे अकेला।
बारिश के दिन, यादें बुनते हैं नया किस्सा,
जीवन में बारिश की तरह, भर दे हर खाली हिस्सा।