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बेवक़्त की बारिश

पानी पे पैरों का निशान कभी टिकता नहीं ।
मौसम का आना और चले जाना
किसिके बस में नहीं।
गर हो सके तो भर लो इन्हें
इस कदर आंखों में
की रुह तक बातें करे
उस तस्वीरों से सरगोशी में।
इस कैद से वो रिहाई
फिर कभी न मांगे।
©gamechnger