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भारत का नायक

लाशों के ढ़ेरों पर चढ़कर,
आसमान को चूम लिया।
दो नंबर के पैसों से मैं,
सारी दुनिया घूम लिया।
जिन गीतों में घोटाला हो,
उन गीतों का गायक हूँ।
मैं खद्दर पहने बैठा हूँ,
मैं भारत का नायक हूँ॥
हाँ ! मैंने खाया है चारा,
भूखा छोड़ा गायों को।
साथी हूँ मैं धनवानों का,
तड़फाऊँ अहसायों को।
कहलाता जनता का सेवक,
एमपी मैं विधायक हूँ।
मैं खद्दर पहने बैठा हूँ,
मैं भारत का नायक हूँ॥
घोटालों का शतक लगाकर,
बन गया घोटालेबाज।
जनता फिर भी समझ न पाएं,
फिर थमा दे मुझको राज।
मैं जनता पर शासन करके,
उनका बना सहायक हूँ।
मैं खद्दर पहने बैठा हूँ,
मैं भारत का नायक हूँ॥
मैं गिरगिट सा रंग बदलता,
बदलूं अपनी बोली को।
वोट लगे अगर वर-वधू का,
रुकवा दूं मैं डोली को।
मैं जनता को दुख देता हूँ,
जनता का दुखदायक हूँ।
मैं खद्दर पहने बैठा हूँ,
मैं भारत का नायक हूँ॥
जब संसद कानून बनाती,
मैं ही मुखिया होता हूँ।
एक अजब कानून बनाकर,
बीज बैर के बोता हूँ।
मैं कानूनी सर्वोत्तम हूँ,
मैं अंतिम निर्णायक हूँ।
मैं खद्दर पहने बैठा हूँ,
मैं भारत का नायक हूँ॥
✍🏻✍🏻 दुर्गेश आचार्य
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