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भक्ति

परमात्मा उसका नाम है
करता सारा काम है
हृदय में उसका स्थान है
समझो चारो धाम है।
सुख में हमारा सौर्य है
दुख में हमारा धैर्य है
वह एक है, अनेक है
धर्म का विवेक है।
जो भी है सब उसका है
हमारा तो, हम भी नहीं
झूठा ये संसार है
वह सत्य का आधार है।
भक्ति में है असीम शक्ति
उलझनों से देती है मुक्ति
कर भक्ति, पा मुक्ति
नहीं आएगी कोई विपत्ति।
आस्था है, विश्वास है
हर जगह उसका वास है
प्रेम उसका लिबास है
हम सब उसके दास है।
©piksa