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Bhuli Bisari yaaden

कुछ बैठे थे खामोश से हम,
उलझे खुद के सवालों में !
एक तीर यादों का लगा हिर्दय में,
नीर छलक गया नेत्रों के प्यालों से! 
यूँ अंधकार सा फिर छा  गया ,
दिन के भरे उजालों में !
एक चेहरा तेरा बना अक्स पर जब , 
एक अमूल्य सी मुस्कान दौड़ गई ,
इन बंद अधरों के तालों से !
फिर हिरदय तंत्रिका नाच उठी, 
कोतुहल चरों और हुआ !
फिर उस मदुर वाणी ने ,
कानो को मेरे जो छुआ !
जब देखा नेत्र घुमाकर तो, 
सन्नाटा था पसरा हर और हुआ! 
उन बहते अश्रुओ ने फिर एक बार ,
ज़ख्मो को मेरे था छुआ !
आत्मा ये पुकार उठी,
क्या केवल था खोट मेरा ?
सम्बन्ध विछेद को बचने खातिर ,
कुछ भी न था क्या फर्ज तेरा ?
एक बार तो मुझे बुलाया होता, 
समीप अपने बिठया होता !
धर कर सर गोद में अपनी, 
प्रेम से तो समझाया होता !
माना हूँ में ढीठ बड़ा पर,
एक बार तो गले लगाया होता !
वहीँ टटूटकर गिर जाता ,
तेरे कोमल उन हाथों में !
जैसे चाहे सवार लेते फिर, 
तुममें ही भगवन को पाया होता !
उस पल से हूँ यहीं खड़ा, 
ज़िद्द का में भी हूँ अडिग बड़ा! 
तुम्ही मनाओगे अबकी बार ,
क्या कोई था ये स्वपन बड़ा ?
में लाख बुरा सही प्रियतमा , 
दूर तुमसे कहाँ रह पता हूँ! 
चेहरा तेरा  देखन की खातिर , 
कितने बहाने बनता हूँ! 
देख तो लेते अपनापन, 
मेरे हर सवालों में !
बिन तेरे न था न होगा, 
मेरे मन  के गलियारों में 
ले पुकार एकबार तो तू ,
कोमल लबों से नाम मेरा! 
फिर दूर कर दूंगा हर एक में, 
जो भी होगा शिकवा तेरा !
दिन बीत गया अब रात हुई, 
बैठे इन्ही ख्यालों में ! 
जग सोया पर नींद कहाँ ,
इन सूजी हुई निगाहों में !
स्वपन देखना भूल चुकी है, 
जो पा लेता फिर स्पर्श तेरा 
इन अपने बीघे गालों पे !
ये सनाटा सूनापन ,
सहा न मुझसे जायेगा! 
आज नहीं तो कल सही, 
प्राण मेरे हर ले जायेगा !
फिर में न होऊंगा पास तेरे, 
बस यादें ही रह जाएगी ! 
कुछ मीठी कुछ कड़वी सही 
बस बातें ही रह जाएँगी !
©mukhar