दिन-भर भूख से तड़पता बच्चा रात को रोते-रोते सो गया
शायद सपनों में मिल जाए रोटी इसलिए सपनों में खो गया।
माँ की गोद में सोया नन्हा सा-रूप भूख का
निस्तेज पीला चेहरा स्वरूप जिंदगी की कड़ी धूप का।
तप रहा बच्चा भूख के बुखार से
शायद जा रहा दूर,पतझड़ की बहार से।
माँ का कलेजा छलनी-छलनी,बच्चे की हालत देखकर
खुद की बेबसी,न मिलने वाली राहत देखकर।
अचानक दर्द से तड़पते बच्चे ने आँखें खोली
उसकी भोली आंखें शायद माँ से कुछ बोली...।
फिर वो आँखें हमेशा के लिए बेजान हो गई
माँ की तो सारी दुनिया ही वीरान हो गई।
मुरझा गया खिलता फूल,धूप के कठोर प्रहार से
तड़पते-तड़पते गई नन्ही सी जान,भूख के बुख़ार से!
Priya Princess Panwar
The Author
स्वरचित,मौलिक
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SurajVihar,New delhi
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