भविष्य की रोशनी

एक आशा की किरण, अनंत अंधेरों में,
भविष्य का सूरज, उम्मीदों के बोझ तले।

जहां धरा खुद को खोने लगे थी,
वहां आशा के दीपक ने खुद को जलाया।

न सितारों की चमक में कमी,
न चांदनी की बातों में घमंड,
भविष्य बस आशा की डोरी है,
जिसे थामे चलता है इंसान, हर बार।

आज के सपने, कल की हकीकत,
भविष्य वही, जो आशा से बुना जाए,
इस यात्रा में, हर कदम पर,
आशा वह पंख है, जो भविष्य तक उड़ाए।