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बनारस में भौकाल

अक्सर... संगमरमर का बिस्तर छोड़.... रेतों पर लेटा करते हैं... (2)
यहाँ.. परायों को भी अपना बना लेते हैं...
  अक्सर अपनी महोब्बत को खोजने... यहाँ... संगम पर ही तो
आतें है|.....
  अक्सर अपने पाप धोने.... भी तो
माँ गंगा की ही  सरण,
लेते हैं..
अरे| एक बार आओ तो बताए क्या चीज है बनारस|
यहाँ.. हर गोरी मेम.... आकर बनारस के रंग में रंग जाती है...
  अपना हुस्न भी तो  आखिर कार बनारसी साड़ी में ही बिखेरा करतीं हैं...
वो देखो.. आज एक  पापी... माहाकाल की जयजयकार करता
दिखाई दे जाता है....
क्योंकि यह बनारस है... इसलिए ऐसा होता है...
अरे!... एक बार आओ तो बताए क्या चीज़ है बनारस|
©prerana-p