बरसती बूंदों का प्यारा सा गीत,
मिट्टी से उठती खुशबू अतीत।
सोंधी-सोंधी महक का जादू छाए,
मन मेरा भी बारिश संग मुस्काए।
बादल गाएं धुन मधुर सुहानी,
धरती ओढ़े हरियाली की रानी।
बूंदें गिरें जैसे मोती बनकर,
नाचे पत्ते खुशी में झूम-झूमकर।
भीगी राहें, ठंडी हवाएँ,
दिल में नई उमंग जगाएँ।
बारिश और मिट्टी का यह मेल,
जैसे प्रकृति का अनमोल खेल।
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