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बुढे हो चले है वो...

धयान रखो कूछ उनका भी
अब हो गयी उनकी उमर ऐसी
कौध ना करो उनपर
कंनधो पर झुलाया है आपको कभी
अगर वो कुछ मांगे दे दिया कऱो
थोडी सी परवाह चाहियो
क्योंकि बुढे हो चले है वो...
नजर अब धुधंली सी हो गयी
सहला दो उनको
जो थक कर सो गयी
जिद करे चाहे कोई
समज जाओ तुम अब तो उनकी उमर हो गयी
मत डाटो अगर जो सुनाई ना दे उनको
क्योंकि अब बुढे हो चले है वो...
परवाह आज भी उतनी ही है जितनी कल थी
आज भी डाट लगाकर कैह जाते है सिर फिरी
लडखडाते है उनके कदम
अब थाम लो उनका हाथ तुम
बचपन मै हम भी किया करते थे जो
वो हि सहारा उनको भी चाहिये
वकत वकत की बात है कया करे
बुढे हो चले है वो...
तजुरबा उनका अनोखा है
ये वो पेड है जिनकी जडे मजबुत है
पर खुद सुखा है
सलाह मांन लो उनकी
माता पिता है वो
कोई उनके जैसा प्यार नही करेगा
चाहे चले जाओ किसी भी किनारे
चश्मा टूट जाए जो उनका
नया खरीद कर दे दो
सच्ची दौलत है वो ख़्वाब उनके पुरे करने है
"क्योंकि अब बुढे हो चले है वो"...
Written by
Hiral Nayna Jayant Ved
Dated: 12th October 2019..
©hiralved