काश के कोई समंदर अपना हो,
रास्ते बनाने के मुकद्दर अलग होते,
ख्वाइश तो चांद की रहती किसको नहीं है,
बात तो तब होती जब कोई आसमा अपना होता...
चुप तो रह लेते कुछ देर तक,
आखरी सांस बेताब थी शाम होने तक ,
वहा कहा रात की खबर किसको,
बात तो तब होती सूरज निकलता एक हसीन शाम देने को.....
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