चाय की कहानी...!
चाय है ऐक मासूम सी काली जब पौधें पर वह खिलती,
चाय है निदर वह तरह तरह मौसम को झेलती,
चाय हैं खुशनसीब नाजुक हाथों से जो कटी,
चाय हैं शहनशील कोई मशीनों से वह गुजरी,
चाय है तक़दीरवाली निलामी में उसपर लगे बोली,
चाय हैं किमती व्यापारी के हाथ जब लगी,
चाय हैं कडक मिठी खुशबूदार पानी में जब उबली,
चाय हैं शाही प्याली में जब परोसी,
चाय हैं मतवाली पीने वाले मे ले आये ताज़गी,
चाय हैं एक जरिया रिश्तेदारी निभाने की,
चाय हैं अन्नपूर्णी कईयों की भूख को मिटाती,
चाय हैं औषधि पिने से दूर रखें कई बिमारी,
चाय हैं शरबती आईस टी का रूप जब धारण करती,
चाय हैं रंगीली रंग दे हमारे दिल मैं प्यारी दोस्ती,
चाय हैं जबरदस्त रखें दोस्ती को पक्की,
चाय हैं और रहेगी यादगार कोई पुषतो तक चले ईस की कहानी...!
(हेमंत शाह की रचना.......)
©hemantjsha
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