आजकल छत पर जाना छोड़ दिया हमने
उस छत के हर कोने मे अब तेरी यादों का पहरा सा है
उस गली से गुजरना छोड़ दिया हमने
जहाँ से तू अक्सर गुजरा करता है
उन शीशो मे देखना छोड़ दिया खुद को हमने
जिसमे तू मुझे देखकर मुस्कुराता है
उन किताबों को पढ़ना छोड़ दिया हमने
जिनके पन्नों मे तेरे दिए गुलाबों की खुशबू आज भी है
उन बालों को खुला रखना छोड़ दिया हमने
जिनकी लहराती लटो मे तेरे उंगलियों की छुअन आज भी है
मोबाइल पर व्हाट्सप्प खोलना छोड़ दिया कब से
तुझे ऑनलाइन देखने की हिम्मत अब नही है
हमने छोड़ दिया तेरा इंतज़ार करना
क्युकी तेरा इंतज़ार भी अब सजा सा है
हमने छोड़ दिया प्यार करना तुझे
तेरे प्यार पर अब हक़ किसी और का है
जा छोड़ दिया हमने तुझे ए कातिल
,इश्क़ मे क़त्ल होना तेरा नज़राना सा है
✍️शिवन्या©04shivanya
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