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चीख (RAPE)

चीख सुनी है मैंने उस चिड़िया की जिसको दरिंदों ने दबोचा है,वह भी उड़ना चाहती थी नभ में किसी दरिंदे में उसका सपना उजाड़ा है |
किसी मां की आंख की तारा को पापा की अभिलाषा को दरिंदों ने सताया है तभी तो चीख सुनी है मैंने उस चिड़िया की जिसको दरिंदों ने दबोचा है|
सवाल मेरा आपसे भी है क्यों चीख रही बेटी है हर घर हर मोहल्ले मैं पीस रही क्यों बैठी है?
निर्भया और प्रियंका जैसी और कितनी मासूम अपनी इज्जत गांवआएंगी ?
कब जागेंगे हम और बेटी चैन की नींद पाएंगी अभी और कितने घर उजड़ आएंगे इस युग में और कब तक रखेंगे कैद बेटियों को हम घर में ?
खून खोलता है मेरा यह सब सोचकर,
कैसे शांत हैं आप सब यह सोचकर जी मेरा मचलता है|
चलो आओ सब मिलकर हम यह कसम खाते हैं बेटियों के साथ होनेवाले दुष्कर्म के खिलाफ एकमत होकर आवाज उठाते हैं|
अपने देश से रेप जैसी घटिया चीज को हमेशा के लिए भगाते हैं|
©luckypande