डटे रहना डटे रहना तुम कभी डोलना मत,
वक़्त है कठिन अभी , मन के अरमान खोलना मत।
राहे खुली है मंजिल भी करीब है मगर तूम चलना मत,
जानते है फितरत नही तुम्हारी बन्द रहने की , मगर अभी घर से निकलना मत।
है दुश्मन हमारा चालाक बहुत नजर वो आता नही,
मगर जब तक हम उसे न छुए हम में वो घर कर जाता नही।
हो सतर्क, स्वस्थ सारे इस जहाँ में बस यही चाह करना है,
अपनी ही नही हमे दुसरो की भी परवाह करना है।
©kulavinder
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