देख किधर तू सोया है।
लैश मात्र ना ज्ञान है तुजको
क्या पाया क्या खोया है।
यही बताता जा तू सबको
क्यों की दुनिया है इससे बनी
और मिट जाएगी इससे इक दिन
तू सोया है सोया रह
जो पाना था रह गया ।
और जो मिला है उसे भी खो देगा तू इक दिन
तो ना खोने का प्रण ले आब तू
आलास को अब तू त्याग दे
और दुनिया की सोच से निकल जा आगे तू
क्यों की दुनिया में रह रहा मनुष्य
सोच है इसकी धीमी और छोटी
और अगर इसकी जंजाल में फंस जाएगा तो
नहीं पहुंच पाएगा सफलता की चोंटी।
देख किधर तू सोया है ।
आने वाली दुनिया में
आलस तब एक प्राणी है
और सफलता एक कम से कम सोचने वाली कहानी है।
अगर तू मुझ को समझता है
ज्ञान मिलेगा इससे तूजको।
अगर तू फिर कहीं भटकता है
राह मिलेगी इससे तुजकों
ज्ञान नहीं ये आत्मज्ञान है
या दिया आत्मा ने जो ज्ञान हैं।
देख किधर तू सोया हैं
मिट जाएगा तू भी इक दिन
नहीं चुनेगा अगर राह तू अपनी
कर तू अब सफलता मे विचार
परमात्मा तुज में करेगा ज्ञान का संचार।
अगली बार पढ़े तू जब इसको
ना रहे निराशा की झलक
क्यों की बनाते तो परमात्मा ही है सब को
परन्तु हर कोई नहीं खोज सकता उनको।
देख किधर तू सोया है।
©manas007
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