I

दहेज:एक अभिशाप

दहेज उपहार नहीं अभिशाप है
सदियों से बना बैठा रीति रिवाज़ है
समाज के डर से बाप दहेज दे जाता है
खुद को बेच कर बेटी का घर भर जाता है
पर भूख इससे भी कहाँ मिटती है
इन लालची भेड़ियों की
इन्होंने तो लालच की सारी हदें ही पार कर दी हैं।
©inqualab